केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में खनिज अन्वेषण गतिविधियों को बड़े पैमाने पर तेज करने की योजना बना रही है, जिसमें महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) और रणनीतिक खनिजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह जानकारी खान सचिव पीयूष गोयल ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 से 2031 के बीच खनन मंत्रालय खनिज संसाधनों की पहचान और खोज को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाएगा।
खान सचिव ने बुधवार (21 जनवरी 2026) को केंद्रीय भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (CGPB) की 65वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) को अन्वेषण परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रयासों को और मजबूत करते हुए कुल 500 अन्वेषण परियोजनाएं शुरू करने की योजना है, जिनमें से कम से कम 300 परियोजनाएं रणनीतिक या महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित होंगी।
पीयूष गोयल ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और उच्च तकनीक उद्योगों के बढ़ते विस्तार के कारण महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरेलू संसाधनों की पहचान और दोहन अत्यंत आवश्यक है।
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सरकार का मानना है कि इन खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से भारत की औद्योगिक क्षमता मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही, खनिज अन्वेषण से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और खनन से जुड़े क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीकों, डेटा एनालिटिक्स और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर खनिज खोज को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाएगा। मंत्रालय का लक्ष्य है कि रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरे।
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