केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार (21 जनवरी, 2026) को गीता प्रेस की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था लाभ के लिए काम नहीं करती बल्कि पीढ़ियों के चरित्र और संस्कार को आकार देने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने हर युग में सनातन चेतना को जीवित रखा है और भारतीय संस्कृति के दीप को जलाए रखा है।
श्री शाह ने यह बात ऋषिकेश में गीता प्रेस के मासिक पत्रिका कल्याण के शताब्दी अंक के विमोचन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि संकट के समय में भी गीता प्रेस ने धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के मार्ग को बनाए रखने का कार्य किया। इसने सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक और नैतिक शक्ति को संगठित करने में योगदान दिया है।
गृह मंत्री ने कहा कि गीता प्रेस का उद्देश्य केवल साहित्य का प्रकाशन नहीं बल्कि विचार और संस्कृति के माध्यम से समाज और आने वाली पीढ़ियों के चरित्र निर्माण में योगदान देना है। उन्होंने संस्था की यह भूमिका सराहनीय बताते हुए कहा कि इसने भारतीय संस्कृति और सनातन विचारधारा को हर युग में जीवंत बनाए रखा।
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उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि गीता प्रेस के प्रकाशनों ने लोगों में नैतिकता, धर्म और सामाजिक चेतना को बढ़ावा दिया है। गृह मंत्री के अनुसार, गीता प्रेस का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज को नैतिक दिशा देने वाला प्रमुख संस्थान है।
अमित शाह ने गीता प्रेस की इस पहल को उदाहरण बताते हुए कहा कि यह संस्था लाभ के पीछे नहीं बल्कि धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रही है। उन्होंने इसके प्रकाशनों और प्रयासों को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरक बताया।
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