भारत अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीक को लगातार मजबूत कर रहा है। देश ने समुद्र और आसमान में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मानवरहित प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इनमें मातंगी नामक स्वायत्त नाव, वरुण नाम का व्यक्ति को ले जाने में सक्षम पायलट रहित विमान और बेहद ऊंचाई से लॉन्च किया जा सकने वाला मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) शामिल हैं।
पुणे स्थित सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने मातंगी और वरुण को विकसित किया है, जबकि एयरोस्पेस स्टार्टअप कलाम लैब्स ने गुब्बारे की मदद से लॉन्च होने वाली स्ट्रैटोस्फेरिक यूएवी प्रणाली तैयार की है। ये तकनीकें भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विस्तार को दर्शाती हैं।
मातंगी: बिना इंसानी हस्तक्षेप के 1,500 किलोमीटर का समुद्री सफर
मातंगी एक स्वदेशी स्वायत्त सतही पोत (एएसवी) है, जिसे समुद्र में लंबी दूरी तय करने के लिए बनाया गया है। वर्ष 2024 में इस मानवरहित नाव ने मुंबई से तमिलनाडु के तूतीकोरिन तक लगभग 1,500 किलोमीटर की यात्रा बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूरी की थी।
और पढ़ें: राजनाथ सिंह ने जारी किया भारतीय सेना का भूमि युद्ध सिद्धांत 2026, भविष्य की जंग में एआई और ड्रोन की होगी अहम भूमिका
इस पोत में स्वायत्त नेविगेशन और टक्कर से बचने जैसी तकनीकें हैं। इनकी मदद से यह अपने रास्ते का निर्धारण कर सकता है, आसपास की परिस्थितियों का आकलन कर सकता है और समुद्र में सुरक्षित संचालन कर सकता है।
वरुण: इंसान को ले जाने वाला पायलट रहित विमान
वरुण एक ऐसा हवाई प्लेटफॉर्म है, जिसे एक व्यक्ति को ले जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना के ‘स्वावलंबन’ कार्यक्रम के दौरान इसका प्रदर्शन देखा था।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वरुण लगभग 150 किलोग्राम वजन ले जाने में सक्षम है। इसमें स्वचालित उड़ान भरने और उतरने की सुविधा भी बताई गई है। भविष्य में इसका इस्तेमाल युद्धपोतों के बीच जरूरी सामान पहुंचाने, आपातकालीन सहायता और चिकित्सा निकासी जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
1.18 लाख फीट से लॉन्च होने वाला यूएवी
कलाम लैब्स ने गुब्बारे की सहायता से बेहद ऊंचाई पर यूएवी तैनात करने की तकनीक विकसित की है। कंपनी के अनुसार, इस विमान को 1,18,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित गुब्बारा प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।
यह तरीका पारंपरिक ड्रोन प्रणालियों से अलग है और वायुमंडल के ऊपरी हिस्से से मानवरहित विमान तैनात करने की नई संभावना प्रस्तुत करता है। हालांकि, इस तकनीक के वास्तविक परिचालन उपयोग और क्षमताओं का आकलन विस्तृत परीक्षणों के आधार पर किया जाएगा।
और पढ़ें: भारतीय सेना को मिला स्वदेशी नागास्त्र-2 एंटी-टैंक ड्रोन सिस्टम, बख्तरबंद ठिकानों पर सटीक हमले में सक्षम