रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना का नया ‘भूमि युद्ध सिद्धांत 2026’ जारी किया। इस सिद्धांत में भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, सटीक हमलों, उन्नत तकनीक और कई मोर्चों पर एक साथ सैन्य अभियान चलाने की क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुरूप अधिक आधुनिक, सक्षम और लचीला बनाना है।
नया सिद्धांत हाल के वैश्विक संघर्षों से मिले सबक पर आधारित है। इसमें मानवरहित प्रणालियों, लगातार निगरानी, संचार व्यवस्था में बाधाओं और सूचना युद्ध की बढ़ती भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। यह रक्षा बलों के ‘विजन 2047’ के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं के एकीकरण पर जोर दिया गया है।
आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान
नए सिद्धांत का प्रमुख उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इसमें स्वदेशी रक्षा तकनीक, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और सैन्य संस्थानों के साथ अन्य राष्ट्रीय संस्थाओं के समन्वय को भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी बताया गया है।
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सिद्धांत में सैनिकों को अधिक सक्षम बनाने और मानव तथा मानवरहित प्रणालियों के संयुक्त इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही मानवीय नेतृत्व, मजबूत रसद व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों के बीच प्रभावी ढंग से अभियान चलाने की क्षमता को महत्वपूर्ण माना गया है।
कमांडरों को मिलेगी रणनीति बदलने की स्वतंत्रता
नए सिद्धांत के तहत सैन्य कमांडर खतरे, भौगोलिक परिस्थितियों और अभियान की जरूरतों के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव कर सकेंगे। भारतीय सेना बहु-क्षेत्रीय युद्ध अभियानों के प्रशिक्षण के लिए पांच वर्षीय योजना पर काम कर रही है।
इसके अलावा अधिकारियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ा तीन स्तरीय कौशल विकास कार्यक्रम और पूरे सैन्य बल में ड्रोन संचालन को एक अतिरिक्त कौशल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
वर्ष 2018 के सिद्धांत से कितना अलग?
भारतीय सेना का पिछला भूमि युद्ध सिद्धांत दिसंबर 2018 में जारी हुआ था। उससे पहले अप्रैल 2017 में सशस्त्र बलों का संयुक्त सिद्धांत जारी किया गया था। वर्ष 2018 के दस्तावेज में सीमावर्ती चुनौतियों, हाइब्रिड युद्ध, बहु-मोर्चीय अभियानों, निगरानी, सटीक हमलों, अंतरिक्ष युद्ध और विशेष बलों की भूमिका पर चर्चा की गई थी।
इसके बाद लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ लंबे समय तक चला गतिरोध और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्षों ने सैन्य रणनीतियों को प्रभावित किया है। ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की बढ़ती भूमिका को देखते हुए नया सिद्धांत भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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