भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव कराने की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया है।
नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को सख्त संदेश देते हुए कहा कि ऐसे कदम गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और स्वतंत्रता से वंचित करने जैसे मुद्दों को छिपा नहीं सकते।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान के समक्ष औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया है, क्योंकि वह 7 जून को तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए चुनाव कराने की योजना बना रहा है।
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भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल है, 1947 में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय के बाद से भारत का हिस्सा हैं। इसलिए इस क्षेत्र में पाकिस्तान की कोई भी कार्रवाई अवैध है।
नई दिल्ली ने कहा कि पाकिस्तान की ऐसी कोशिशें वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकतीं, क्योंकि वह भारतीय क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा बनाए हुए है और उसे इन्हें खाली करना चाहिए।
इस बीच, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गिलगित-बाल्टिस्तान में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है और दमन बढ़ रहा है।
मिर्जा के अनुसार, क्षेत्र में लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गहरा असंतोष है और राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग को दबाया जा रहा है।
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