भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर यूरोपीय संघ (EU), पाकिस्तान और चीन की ओर से की गई टिप्पणियों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच हुए आठवें रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में जम्मू-कश्मीर के संदर्भों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा जिनका इस विषय में कोई वैधानिक अधिकार (लोकस स्टैंडी) नहीं है, उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
यह बयान उस संयुक्त विज्ञप्ति के बाद आया है, जिसमें पाकिस्तान ने यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर जानकारी दी थी। इसके जवाब में भारत ने अपनी पुरानी और स्पष्ट नीति दोहराई।
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विदेश मंत्रालय ने हाल ही में चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान पर भी आपत्ति जताई थी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक के बाद जारी बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किया गया था। इस पर भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
रणधीर जायसवाल ने तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजनाओं का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का कुछ हिस्सा भारत के संप्रभु क्षेत्र में आता है और भारत किसी भी ऐसे प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता प्रदान करे।
भारत ने यह भी दोहराया कि वह पाकिस्तान और चीन के बीच हुए तथाकथित 1963 सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं देता और अपनी संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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