भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्थलों को लेकर की गई टिप्पणी को सख्ती से खारिज करते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के घरेलू मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को पूरी तरह अस्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान के राष्ट्रपति को कोई अधिकार या वैधानिक आधार नहीं है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने और उन्हें खतरा होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वाराणसी स्थित लगभग 1,000 वर्ष पुराने मस्जिद गंज शहीदा का भी उल्लेख किया।
और पढ़ें: बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले, चार महीनों में हिंसा के 505 मामले दर्ज
भारत ने जवाब में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से विभिन्न धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों का सामना करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा में उसकी विफलता पर लगातार चिंता जताई जाती रही है।
रणधीर जयसवाल ने कहा कि पाकिस्तान का विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उन्हें हाशिए पर धकेलने का इतिहास पूरी दुनिया में जाना जाता है। ऐसे में ज़रदारी की टिप्पणी वास्तविक चिंता नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से किया गया हमला प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नीतियां लंबे समय से कट्टरता और नफरत पर आधारित रही हैं, इसलिए इस तरह के बयान विश्वसनीय नहीं लगते। वहीं, ज़रदारी ने अपने बयान में भारत से कथित कार्रवाइयों को रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की अपील की थी।
और पढ़ें: ओमान तट के पास अमेरिकी कार्रवाई में जहाज पर हमला, तीन भारतीय लापता; भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब किया