जब भारत अपने निर्यात को विविध बनाने और अमेरिकी शुल्कों (टैरिफ) के प्रभाव को कम करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत को तेज कर रहा है, ऐसे समय में नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने अहम संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अपने एफटीए साझेदार देशों के साथ व्यापार घाटा तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों (सनराइज इंडस्ट्रीज) का निर्यात वैश्विक स्तर पर मजबूत होता जा रहा है।
नीति आयोग की मंगलवार को जारी ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष अप्रैल से जून की तिमाही के दौरान भारत का एफटीए देशों के साथ व्यापार घाटा साल-दर-साल आधार पर 59.2 प्रतिशत बढ़ गया। इस अवधि में आयात 10 प्रतिशत बढ़कर 65.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि निर्यात में 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 38.7 अरब डॉलर रहा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत कई एफटीए साझेदारों के साथ व्यापार असंतुलन का सामना कर रहा है। खासतौर पर आसियान (ASEAN) देशों के साथ व्यापार घाटा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारत और आसियान के बीच मुक्त व्यापार समझौते की शर्तों पर पुनः बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों पक्ष 2025 के अंत तक तय समयसीमा को पूरा नहीं कर सके। इसी बीच, अक्टूबर में आसियान और चीन ने अपने मुक्त व्यापार समझौते के उन्नत संस्करण पर हस्ताक्षर कर लिए, जिससे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।
और पढ़ें: भारत–ओमान मुक्त व्यापार समझौते पर 18 दिसंबर को हस्ताक्षर, पीयूष गोयल ने की पुष्टि
इसके बावजूद, नीति आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने वैश्विक बाजार में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पाद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भारत के निर्यात पोर्टफोलियो में तेजी से अपनी जगह बना रही हैं। यह संकेत देता है कि सही नीतिगत समर्थन और निवेश के साथ भारत उभरते क्षेत्रों में अपनी वैश्विक मौजूदगी और मजबूत कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में एफटीए समझौतों को संतुलित और भारत के हितों के अनुरूप बनाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि व्यापार घाटे को नियंत्रित किया जा सके और निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
और पढ़ें: त्रुटिरहित एनआरसी से ही असम में निष्पक्ष चुनाव संभव: AASU