भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर अपने रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक शिपिंग को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल को खतरे में डालना और जलमार्ग में बाधा डालना अस्वीकार्य है।
हरीश ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा और उर्वरक संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से तात्कालिक राहत और दीर्घकालीन संरचनात्मक सुधारों का संतुलित मिश्रण अपना रहा है। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) की विशेष बैठक में कही, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
हरीश ने पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते हालिया ऊर्जा और उर्वरक संकट के संदर्भ में भारत की रणनीति साझा की। तात्कालिक और संरचनात्मक उपायों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक शिपिंग को निशाना बनाना और नेविगेशन रोकना अस्वीकार्य है। अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान होना चाहिए।
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इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए एक ‘पेशेवर तंत्र’ घोषित किया है, जो जल्द ही लागू होगा। ईरानी संसद के NSC प्रमुख इब्राहीम अजीज़ी ने कहा कि केवल वाणिज्यिक जहाज और ईरान के साथ सहयोग करने वाले पक्ष इसका लाभ उठा पाएंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया कि अगर पश्चिम एशिया में शांति समझौता नहीं हुआ, तो क्षेत्र में “बहुत बुरा समय” आ सकता है। वहीं, अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका अभी भी शांति प्रक्रिया में सबसे बड़ा बाधक बना हुआ है।
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