भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार (7 जनवरी 2026) को बताया कि कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान देश ने 6.34 गीगावॉट (GW) की नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। इसके साथ ही वर्ष 2025 के अंत तक भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता बढ़कर 54.51 गीगावॉट तक पहुँच गई है।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान पवन ऊर्जा क्षमता, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13.2 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और नवीकरणीय स्रोतों पर बढ़ते फोकस को दर्शाती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में जोड़ी गई पवन ऊर्जा क्षमता, वर्ष 2024 में जोड़ी गई क्षमता की तुलना में लगभग 85.4 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2024 में भारत ने केवल 3.42 गीगावॉट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की थी और उस वर्ष के अंत तक देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता 48.16 गीगावॉट रही थी।
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सरकार के अनुसार, पवन ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ी से हो रहा विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। नई परियोजनाओं, बेहतर नीतिगत समर्थन और निजी निवेश में बढ़ोतरी के कारण इस क्षेत्र को गति मिली है।
पवन ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। इससे न केवल कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घट रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिल रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर पवन ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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