अमेरिका में भारतीय दूतावास ने व्यापार वार्ताओं, ऑपरेशन सिंदूर और भारत–अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सहयोगी से जुड़ी लॉबी फर्म की सेवाएं लीं। यह जानकारी अमेरिका के न्याय विभाग (DoJ) में दाखिल एक अमेरिकी लॉबी फर्म की फाइलिंग से सामने आई है।
विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के तहत की गई इस फाइलिंग के अनुसार, भारतीय दूतावास ने 10 मई 2025 को—यानी ऑपरेशन सिंदूर में संघर्षविराम के दिन—ट्रंप प्रशासन के तीन वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया था। इनमें व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल शामिल थे। फाइलिंग में बताया गया है कि इन संपर्कों का उद्देश्य संघर्ष से जुड़ी “मीडिया कवरेज” पर चर्चा करना था।
हालांकि, दस्तावेज़ों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये बातचीत संघर्षविराम से पहले हुई थी या उसके बाद, लेकिन यह जरूर संकेत मिलता है कि उस दिन दोनों पक्षों के बीच करीबी संवाद रहा। दिसंबर 2025 में DoJ की FARA वेबसाइट पर दर्ज की गई करीब 60 प्रविष्टियों में यह भी उल्लेख है कि लॉबी फर्म एसएचडब्ल्यू (SHW) से यह कहा गया था कि वह भारत के मंत्री, विदेश सचिव और अमेरिका में भारतीय राजदूत के लिए वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों—जैसे रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ—के साथ बैठकें तय कराए।
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The Indian Witness द्वारा पूछे गए विस्तृत सवालों के जवाब में भारतीय दूतावास ने इन फाइलिंग्स से इनकार नहीं किया। हालांकि, दूतावास ने यह स्पष्ट किया कि लॉबी फर्मों की सेवाएं लेना एक “मानक प्रक्रिया” है, जिसका उद्देश्य अमेरिका में भारत की कूटनीतिक पहुंच और संवाद को मजबूत करना होता है।
इस खुलासे ने भारत–अमेरिका संबंधों में कूटनीतिक प्रयासों और लॉबिंग की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दिया है।
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