भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) फिलहाल “अस्थायी रूप से स्थगित” (abeyance) स्थिति में रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करने के लिए ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत का रुख इस मुद्दे पर पूरी तरह स्थिर और स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “भारत का सिंधु जल संधि पर रुख लगातार एक जैसा है। यह संधि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के कारण अस्थायी रूप से स्थगित है। पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और स्थायी रूप से छोड़ना होगा।”
भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्री मुसद्दिक मलिक के बयान के बाद आई है। मलिक ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी पर किसी भी दावे को “बर्दाश्त नहीं करेगा” और ऐसे प्रयासों का कड़ा जवाब देगा।
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वहीं पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने दावा किया कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी यह संधि कानूनी रूप से बाध्यकारी है और इसे एकतरफा न तो रोका जा सकता है और न ही बदला जा सकता है।
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच लगभग नौ वर्षों की बातचीत के बाद हस्ताक्षरित हुई थी, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच नदी जल के बंटवारे और प्रबंधन को नियंत्रित करना था।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक कदम था सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय, क्योंकि भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया था।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्रीय परियोजनाओं और द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं को राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाता रहेगा।
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