पूर्व सिंगापुर राजनयिक बिलाहारी कौसिकन (Bilahari Kausikan) ने पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यह देश लंबे समय से “असफलता के कगार पर” खड़ा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की समस्याओं की जड़ भारत या अफगानिस्तान नहीं, बल्कि उसके अपने राजनीतिक नेतृत्व और सेना हैं।
बिलाहारी कौसिकन, जो 2010 से 2013 तक सिंगापुर के विदेश मामलों के स्थायी सचिव रह चुके हैं, ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर अपनी भू-राजनीतिक उपलब्धियों पर गर्व करता है, लेकिन हकीकत यह है कि वहां की आम जनता गंभीर गरीबी और कट्टरवाद से जूझ रही है।
उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार नहीं होते, तो दुनिया शायद उस पर ध्यान भी नहीं देती।” उनके अनुसार, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो थोड़ी बहुत जगह मिली है, वह केवल रणनीतिक कारणों से है, न कि उसकी वास्तविक स्थिरता के कारण।
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पूर्व राजनयिक ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने कुछ कूटनीतिक अवसरों का लाभ उठाकर अमेरिका सहित कुछ देशों में अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है, लेकिन इससे देश की मूल समस्याएं खत्म नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में व्याप्त समस्याएं केवल बाहरी नहीं हैं, बल्कि आंतरिक रूप से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उनके अनुसार, “पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था शुरू से ही खराब तरीके से संचालित होती रही है।”
एक पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा सीमा तनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कौसिकन ने स्पष्ट कहा कि यह एक “बहाना” है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की समस्याओं के लिए पड़ोसी देशों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां समस्या का समाधान नहीं हैं और वहां की सेना भी संकट का बड़ा कारण है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने भी पाकिस्तान के प्रति अपना रुख सख्त किया है, जिसमें वीजा नीतियों में बदलाव जैसे कदम शामिल हैं।
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