पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता के विफल होने के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को अपनी “तानाशाही” नीति छोड़नी होगी और ईरान के अधिकारों का सम्मान करना होगा।
मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि अगर अमेरिका निष्पक्ष रवैया अपनाता है, तो समझौते का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने ईरानी वार्ता दल की भी सराहना की और विशेष रूप से मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ का उल्लेख करते हुए उनके प्रयासों की तारीफ की।
दूसरी ओर, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्वीकार किया कि इस्लामाबाद में तीन चरणों में हुई गहन बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। उन्होंने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार रहे।
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वेंस ने बताया कि अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान स्पष्ट और बाध्यकारी आश्वासन दे कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। यह मुद्दा समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान न केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई कदम न उठाए।
ईरान ने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिका की “अतार्किक मांगों” को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका को अपने दबावपूर्ण रवैये को बदलना होगा। वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना हो गए।
इस घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर भी इसके असर को लेकर चिंता बनी हुई है।
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