भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की नौ कर्मचारी एसोसिएशनों ने अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर लॉन्च व्हीकल और अन्य प्रमुख कार्यों को निजी कंपनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को सौंपने की नीति पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
यह पत्र 4 सितंबर 2026 को उस समय भेजा गया, जब इसरो ने जीएसएलवी एफ17-ईओएस-05 मिशन का सफल प्रक्षेपण किया था। कर्मचारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के 21 अगस्त के एक सम्मेलन में दिए कथित बयान का हवाला दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा था कि भविष्य में इसरो लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा और यह काम निजी क्षेत्र या सार्वजनिक उपक्रम करेंगे।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बयान को व्यापक प्रचार मिला, लेकिन सरकार की ओर से अब तक ऐसी नीति का कोई स्पष्ट आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है। उन्होंने नीति के कानूनी आधार, चरणबद्ध क्रियान्वयन और कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी मांगी है।
और पढ़ें: पीएम मोदी ने GSLV-F17 की सफलता पर इसरो को सराहा, कहा- अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता और बढ़ती क्षमता का प्रतिबिंब
पत्र में कहा गया है कि एसएसएलवी की तकनीक और उत्पादन अधिकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसे पीएसएलवी तथा एलवीएम3 तक बढ़ाने की योजना बताई जा रही है। संगठनों ने उपग्रह निर्माण और कुलसेकरपट्टिनम में नए स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स के संचालन को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की संभावनाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि आंतरिक काम घटने से भर्ती, पदोन्नति और स्वीकृत पदों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को भी कमजोर होने से बचाना जरूरी है।
हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे निजी उद्योग के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि निजी भागीदारी और इसरो की मूल क्षमताओं को खत्म करने के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।
उन्होंने पीएसएलवी, एलवीएम3 और एसएसएलवी के भविष्य, कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और भर्ती व्यवस्था पर समयबद्ध लिखित आश्वासन की मांग की है।
और पढ़ें: इसरो प्रमुख ने GSLV-F17 मिशन को बताया बड़ी सफलता, बोले- इस वित्त वर्ष में छह और प्रक्षेपण