विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (14 फरवरी 2026) को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित नहीं हुई है। यह टिप्पणी हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के चलते रूस से ऊर्जा आयात में कटौती के दावों के जवाब में आई।
जयशंकर ने कहा, “हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने कहा कि पिछले लगभग दो दशकों से देशों का एजेंडा-आधारित नियमित सहयोग भारतीय कूटनीति की पहचान रहा है। यह दृष्टिकोण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की नीति की मजबूती को दर्शाता है।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारत और जर्मनी ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कई पहलें की हैं। उन्होंने जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत की विदेश नीति किसी भी बाहरी दबाव में प्रभावित नहीं होती।
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जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संबंध और वैश्विक साझेदारी में भारत का निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता केवल व्यापार या ऊर्जा आयात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता, सहयोग और रणनीतिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में है।
भारत की कूटनीति की यह विशेषता रही है कि वह किसी भी बड़े देश के दबाव में अपने निर्णयों को बदलने की बजाय स्वायत्त और संतुलित नीति अपनाता है। जयशंकर ने दोहराया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है।
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