जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जम्मू-कश्मीर गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने हॉस्टल मेस में कथित अनियमितताओं और प्रशासन द्वारा पहले दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू नहीं करने के आरोप में 11 सितंबर को फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्राओं ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का आरोप है कि शुक्रवार सुबह उन्हें नाश्ता नहीं दिया गया, जबकि दोपहर का भोजन तीन बजे के बाद उपलब्ध कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भोजन परोसते समय मेस में पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। छात्राओं ने भोजन लेने से पहले नाम और मोबाइल नंबर देने की कथित व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इससे प्रदर्शन में शामिल छात्राओं की निगरानी या उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है।
छात्राओं ने भोजन आपूर्तिकर्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने ठेकेदार बदलने का दावा किया, लेकिन वही व्यक्ति दूसरे नाम से भोजन की आपूर्ति कर रहा है। छात्राओं के मुताबिक, यह ठेकेदार 2023 से हॉस्टल के भोजन ठेके से जुड़ा रहा है।
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एआईएसए की जामिया इकाई के सचिव सौरभ ने आरोप लगाया कि खराब भोजन की शिकायत करने वाली छात्राओं को धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, छात्राओं ने पहले भी विरोध किया था और उस दौरान प्रशासन ने चारों मांगों को लिखित रूप से स्वीकार किया था।
छात्राओं की पहली मांग मौजूदा भोजन ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने की है। दूसरी मांग मेस में पुरुष कर्मचारियों की जगह महिला कर्मचारियों की नियुक्ति है। तीसरी मांग प्रोवोस्ट निकहत और वार्डन के इस्तीफे की है। चौथी मांग है कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के खिलाफ किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई या प्रशासनिक उत्पीड़न न किया जाए।
छात्राओं का कहना है कि प्रशासन से लिखित समझौते के बावजूद मांगों पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सेंचुरी गेट की लाइटें बंद कर दी गईं। छात्राएं अब पुराने आश्वासनों को लागू करने और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग पर अड़ी हैं।
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