झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात गिरिडीह जिले के मर्सी अस्पताल में निधन हो गया। 56 वर्षीय सोनू की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हुई। वह गिरिडीह से विधायक होने के साथ पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेल और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के एक नेता के अनुसार, सोनू की मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। मर्सी अस्पताल के डॉक्टर शहजाद शेख ने बताया कि मंत्री रात करीब 2:15 बजे अस्पताल पहुंचे थे। उन्हें करीब दो घंटे से सीने में दर्द था। अस्पताल पहुंचने तक उन्हें उल्टी हो चुकी थी और उसका कुछ हिस्सा फेफड़ों में चला गया था। तत्काल उन्हें इंट्यूबेट किया गया। ईसीजी में हार्ट अटैक के संकेत मिले और 10-15 मिनट के भीतर उनकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने सीपीआर समेत तमाम प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सोनू के परिवार में उनकी दो बेटियां और एक बेटा हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि सोनू उनके लिए केवल वरिष्ठ सहयोगी या राजनीतिक साथी नहीं थे, बल्कि बड़े भाई की तरह थे, जो हर कठिन समय में उनके साथ खड़े रहे। हेमंत सोरेन ने कहा कि उनका जाना उनके जीवन में ऐसी कमी छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
और पढ़ें: झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के सदस्य से मारपीट का आरोप, सरकारी गुंडों पर पुलिस में शिकायत
झामुमो ने भी सोनू के निधन को पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। पार्टी ने कहा कि उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
सुदिव्य कुमार सोनू वर्ष 2019 में गिरिडीह विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। वह हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी माने जाते थे और पार्टी के भीतर कई राजनीतिक एवं संगठनात्मक संकटों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
हाल ही में वह झारखंड लौटे थे। इससे पहले उन्होंने कर्नाटक में राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जहां पर्यटन ढांचे और वन प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की थी। उनके अचानक निधन से झारखंड सरकार और झामुमो में शोक की लहर है।
और पढ़ें: रांची में जेपीएससी-जेएसएससी प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई, 14 नामजद समेत 200 से अधिक पर एफआईआर