राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शिवसेना नेता ज्योति वाघमारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र के सोलापुर का प्रसिद्ध हथकरघा धवल भेंट किया। इस भेंट के माध्यम से सोलापुर की पारंपरिक वस्त्र कला और हथकरघा उद्योग की समृद्ध विरासत को सामने रखा गया।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देश की पारंपरिक बुनाई कला और स्थानीय कारीगरों के योगदान को सम्मानित किया गया। इसी दौरान ज्योति वाघमारे ने प्रधानमंत्री मोदी को सोलापुर में तैयार किया गया धवल सौंपा, जो क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक वस्त्रों में शामिल है।
सोलापुर का हथकरघा उद्योग लंबे समय से अपनी गुणवत्ता और विशेष डिजाइन के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां के कारीगर पारंपरिक तकनीकों का इस्तेमाल कर विभिन्न प्रकार के वस्त्र तैयार करते हैं। सोलापुर धवल भी इसी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
और पढ़ें: जंतर-मंतर विवाद: पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाली लड़की का माफीनामा वायरल, बोली- मैं सिर्फ 15 साल की हूं, बहकावे में आ गई थी
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल देश के हथकरघा क्षेत्र, बुनकरों और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस अवसर पर सरकार और विभिन्न संगठनों की ओर से भारतीय हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को बढ़ावा देने पर जोर देते रहे हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत देश के पारंपरिक उद्योगों और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
ज्योति वाघमारे द्वारा प्रधानमंत्री को सोलापुर धवल भेंट करना महाराष्ट्र की हथकरघा परंपरा और वहां के बुनकर समुदाय के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल से सोलापुर के पारंपरिक वस्त्रों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है।
हथकरघा क्षेत्र भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लाखों बुनकर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं और उनकी कला देश की पारंपरिक पहचान को मजबूत करती है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस जैसे अवसर इन कारीगरों के योगदान को सम्मान देने का काम करते हैं।
और पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक दौरे पर, कई विकास परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन और शिलान्यास