कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर बयान देते हुए कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा परिकल्पित समन्वयवादी और बहुलतावादी भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सहयोगी दलों से 1937 में अपनाए गए संस्करण का सम्मान करने की अपील की।
वेणुगोपाल ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन विविध धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों की एकजुट भागीदारी से आगे बढ़ा था। ऐसे में राष्ट्रीय गीत से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा करते समय देश की बहुलतावादी और समावेशी परंपरा को ध्यान में रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण गीत रहा है। हालांकि, इसके पूर्ण संस्करण को लेकर अलग-अलग समय पर बहस होती रही है। कांग्रेस नेता के अनुसार, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए 1937 में जिस संस्करण को स्वीकार किया गया था, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
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केसी वेणुगोपाल ने अपने सहयोगी दलों से भी इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने और 1937 में अपनाए गए संस्करण को स्वीकार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद का मुद्दा बनाने के बजाय सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। कांग्रेस का कहना है कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनी सहमति और ऐतिहासिक संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है।
वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में निहित है। इसलिए राष्ट्रीय गीत और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जुड़े मामलों में ऐसी परंपराओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली हों।
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