दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शनिवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए और दिल्ली आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के बाद अदालत के निर्देश के अनुसार 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका (सिक्योरिटी बॉन्ड) जमा किया।
यह कदम अदालत के 27 फरवरी के उस आदेश के अनुपालन में उठाया गया, जिसमें अदालत ने आम आदमी पार्टी (आप) के दोनों नेताओं समेत इस मामले के सभी 23 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। अदालत ने अपने विस्तृत 1100 से अधिक पैराग्राफ वाले फैसले में कहा था कि दिल्ली की अब समाप्त हो चुकी आबकारी नीति के निर्माण में किसी प्रकार की साजिश या अनियमितता के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
कानूनी प्रक्रिया के तहत दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 437A के अनुसार आरोपमुक्त किए गए व्यक्तियों को एक निश्चित राशि का बॉन्ड जमा करना होता है, ताकि अगर उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती दी जाती है तो वे अदालत के समक्ष उपस्थित हो सकें।
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इस बीच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपियों को नोटिस जारी किया है।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार की आबकारी नीति के जरिए निजी शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और कथित रूप से रिश्वत ली गई। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताते हुए कहा कि सच्चाई अंततः सामने आ गई है।
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