केरल में वंदे मातरम् को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने रविवार को स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत की केवल पहली दो कड़ियां ही गाई जाएंगी। उन्होंने केंद्र की ओर से वंदे मातरम् की पूरी प्रस्तुति के निर्देशों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
मुरलीधरन की यह टिप्पणी केरल के मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा की ओर से 6 अगस्त को जारी पत्र के बाद आई है। पत्र में केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के आयोजनों के तहत राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन करने के निर्देश दिए गए थे।
मुरलीधरन ने कहा कि केरल के सरकारी कार्यक्रमों में पहले से चली आ रही परंपरा के अनुसार केवल पहली दो कड़ियां गाई जाती रही हैं और आगे भी यही व्यवस्था जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में पुराने प्रोटोकॉल का ही पालन किया जाएगा। हालांकि, राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में केंद्र के प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी प्रस्तुति की जा सकती है।
और पढ़ें: लोकसभा से भी पारित हुआ वंदे मातरम् अपमान दंडनीय बनाने वाला विधेयक, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने भी पूरी वंदे मातरम् प्रस्तुति का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केरल में पारंपरिक तरीके से ही राष्ट्रगीत गाया जाएगा और पूरी प्रस्तुति नहीं होगी।
वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी केंद्र के निर्देशों को वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
गौरतलब है कि केरल में वंदे मातरम् की प्रस्तुति को लेकर पहले भी राजनीतिक विवाद हो चुका है। ताजा घटनाक्रम ने राष्ट्रगीत की प्रस्तुति और केंद्र-राज्य प्रोटोकॉल को लेकर बहस फिर तेज कर दी है।
और पढ़ें: पंजाब चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की चर्चा तेज, क्या पार्टी को मिलेगा फायदा?