शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026
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केरल में आरएसएस कार्यक्रम में कुलपतियों की मौजूदगी पर विवाद, मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा- सांप्रदायिक कृत्य; भाजपा का पलटवार

तिरुवनंतपुरम में आरएसएस कार्यक्रम में तीन कुलपतियों की भागीदारी पर केरल में विवाद छिड़ गया। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कार्रवाई की चेतावनी दी, जबकि भाजपा ने उनका बचाव किया।

केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में तीन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (वीसी) की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में भाग लेने पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कुलपतियों की कड़ी आलोचना की है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनके बचाव में मोर्चा संभाल लिया है।

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कुलपतियों की भागीदारी को केरल की शैक्षणिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित कुलपतियों को केरल की जनता से माफी मांगनी चाहिए। सतीशन ने कहा कि किसी भी प्रकार की सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला कार्य स्वीकार्य नहीं है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने आरोप लगाया कि आरएसएस राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस के एजेंडे को लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विजयन ने कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार पर भी भाजपा और संघ परिवार का प्रभावी ढंग से विरोध न करने का आरोप लगाया।

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दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कुलपतियों का बचाव करते हुए कहा कि वे एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और इसके लिए उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री और विपक्षी दलों पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने के दिन अब समाप्त हो चुके हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केरल की राजनीति में कुछ कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव रहा है और सरकार इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही है।

उल्लेखनीय है कि केरल विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय और मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपति तिरुवनंतपुरम में आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आरएसएस को अक्सर गलत समझा गया है, जबकि वह किसी भी समाज या राजनीतिक दल का विरोधी नहीं है।

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