लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित ‘लव जिहाद’ और जबरन धार्मिक परिवर्तन के मामले में एक रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस जांच के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुरुवार को पूरे परिसर में नोटिस चस्पा कर कर्मचारियों और छात्रों से अपील की है कि यदि उन्हें इस तरह की किसी भी गतिविधि से संबंधित शिकायत है तो वे बिना नाम बताए सामने आएं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले ही इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता पैरामेडिक्स के डीन और सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. के. के. सिंह कर रहे हैं। बाद में इस समिति का विस्तार करते हुए इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) भवेश सिंह को भी शामिल किया गया। अब सात सदस्यीय यह समिति विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर अन्य फैकल्टी सदस्यों या व्यक्तियों की धार्मिक परिवर्तन से जुड़ी भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच समिति ने हॉस्टलों, फैकल्टी भवनों और कक्षाओं के बाहर नोटिस लगाकर छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों से शिकायतें आमंत्रित की हैं। नोटिस में कहा गया है कि यदि किसी को भी जबरन धर्मांतरण, दबाव, प्रलोभन या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी है तो वह समिति को गोपनीय रूप से सूचित कर सकता है।
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इस बीच, पुलिस उस रेजिडेंट डॉक्टर से पूछताछ कर रही है, जिस पर एक युवती को प्रेम संबंध के बहाने धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का आरोप है। आरोपों के सामने आने के बाद KGMU प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित डॉक्टर की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि KGMU एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान है और किसी भी तरह की गैरकानूनी या असंवैधानिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के दायरे में की जाएगी।
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