पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित एक आवासीय स्कूल शिक्षा की पारंपरिक अवधारणा को बदलने की दिशा में काम कर रहा है। यह स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 1000 बालिकाओं को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल और आत्मनिर्भर जीवन के लिए तैयार कर रहा है।
‘अधिगम भूमि’ नामक यह स्कूल गैर-लाभकारी संगठन ‘हेल्प अस हेल्प देम’ द्वारा संचालित किया जा रहा है। यहां कक्षा 5 तक की पढ़ाई बिना पारंपरिक पुस्तकों के कराई जाती है, जहां छात्राओं को वास्तविक जीवन के उदाहरणों और अनुभवों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।
इस शिक्षण मॉडल का उद्देश्य बालिकाओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक कौशल से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। छात्राएं यहां खेती, सिलाई, कंप्यूटर कौशल, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशल जैसे विषयों को व्यावहारिक तरीके से सीखती हैं।
और पढ़ें: वैभव सूर्यवंशी ने बनाया लिस्ट A क्रिकेट में विश्व रिकॉर्ड, त्रिकोणीय सीरीज फाइनल में तूफानी अर्धशतक
स्कूल का वातावरण इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्राएं स्वतंत्र सोच विकसित कर सकें और अपने निर्णय खुद लेने में सक्षम बनें। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली ये बालिकाएं अब शिक्षा को केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन बदलने का माध्यम मान रही हैं।
संस्था के अनुसार, इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में मजबूत भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है। यहां शिक्षा को केवल अकादमिक सफलता तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे जीवन कौशल से जोड़ा गया है।
यह पहल ग्रामीण भारत में बालिका शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है।
और पढ़ें: शेख हसीना की अवामी लीग की वर्षगांठ से पहले बांग्लादेश में हाई अलर्ट, अशांति की आशंका से सुरक्षा कड़ी