लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में इबोला संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,011 हो गई है। कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के पांच प्रांतों में संक्रमण के 4,381 पुष्ट मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण की देर से पहचान, सशस्त्र संघर्ष और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव वायरस के तेजी से फैलने की प्रमुख वजहें हैं। यह कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप है और मौजूदा संक्रमण बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। इस स्ट्रेन के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कांगो में फैले इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। पड़ोसी देश युगांडा में भी इसके मामले सामने आए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
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पिछले महीने ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, संक्रमण जनवरी या उससे पहले इटुरी प्रांत में शुरू हुआ हो सकता है। अध्ययन में जनवरी के मध्य से 15 मई के बीच 500 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की गई थी।
प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सामग्री की कमी और असुरक्षा ने संक्रमित लोगों के संपर्कों का पता लगाने, मरीजों को अलग रखने और संक्रमण रोकने के प्रयासों को मुश्किल बना दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2016 के दौरान पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला प्रकोप इससे बड़ा था। गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में उस दौरान 28,616 मामले और 11,310 मौतें दर्ज हुई थीं।
हालांकि, मौजूदा कांगो प्रकोप की रफ्तार बेहद चिंताजनक है। पश्चिम अफ्रीका के प्रकोप में 1,000 मौतों तक पहुंचने में करीब पांच महीने लगे थे, जबकि कांगो में 2,000 मौतें तीन महीने से भी कम समय में हो गईं।
कांगो में 2018 से 2020 के प्रकोप के दौरान 2,000 मौतों का आंकड़ा पार करने में 12 महीने से अधिक समय लगा था। मौजूदा प्रकोप में मौतें एक महीने से भी कम समय में 1,000 से बढ़कर 2,000 हो गईं, जो संक्रमण की असाधारण गति को दर्शाता है।
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