लद्दाख प्रशासन ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने केंद्रशासित प्रदेश में शराब की दुकानों और बारों के विस्तार का आरोप लगाया था। प्रशासन ने उनके बयानों को “झूठा, निराधार और काल्पनिक” बताते हुए कहा कि पूरे लद्दाख में फिलहाल केवल एक शराब की दुकान संचालित है।
प्रशासन की यह प्रतिक्रिया 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक के बयान के बाद आई है। वांगचुक ने दावा किया था कि स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद विभिन्न इलाकों और स्कूलों के आसपास शराब की दुकानें और बार खोले जा रहे हैं।
नई आबकारी नीति वापस लेने का दावा
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, आबकारी नीति 2026-27 को एक जून 2026 को अधिसूचित किया गया था। हालांकि, स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों से सुझाव मिलने के बाद उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 26 अगस्त 2026 को इस नीति को वापस ले लिया। नई नीति के तहत शराब की दुकानें खोलने का प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया और नीलामी संबंधी नोटिस वापस ले लिया गया।
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प्रशासन ने बताया कि चार अप्रैल 2025 को अधिसूचित पुरानी आबकारी नीति 2025-26 को फिर से लागू किया गया है। इसके तहत लेह के वार्ड नंबर चार और छह में दो दुकानों की अनुमति थी। 14 अक्टूबर 2026 को नीलामी के बाद वार्ड छह की दुकान चालू हुई, जबकि वार्ड चार के लिए कोई बोली नहीं मिली। इसलिए वहां दुकान नहीं खुली।
बार और होटल लाइसेंस पर भी दी सफाई
प्रशासन के मुताबिक, लद्दाख में रेस्तरां से जुड़े 50 शराब बिक्री केंद्र संचालित हैं। इनमें लेह में 38, नुब्रा में सात, जांस्कर में तीन और चांगथांग में दो केंद्र शामिल हैं। लेह में दो बीयर बार भी चल रहे हैं। इसके अलावा, लेह के नौ होटलों के पास शराब के लाइसेंस हैं।
प्रशासन ने कहा कि लाइसेंस निर्धारित नियमों के अनुसार दिए जाते हैं। इनमें राजमार्गों, धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों से दूरी संबंधी शर्तें भी शामिल हैं। उसने वांगचुक से सार्वजनिक बयान देने से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने की अपील की।
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