लद्दाख के नागरिक समाज संगठन लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) ने 2025 में हुई हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। संगठन ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन के बीच चल रही बातचीत की धीमी गति पर चिंता जताते हुए गुरुवार (6 अगस्त 2026) को अपनी मांगें रखीं।
एलएबी ने सितंबर 2025 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस हिंसा में चार स्थानीय लोगों की मौत हुई थी। संगठन के अध्यक्ष चेयरिंग दोरजे लाक्रुक ने कहा कि उस दौरान करीब 70 से 80 युवाओं के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने मांग की कि इन मामलों को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि लंबित मुकदमों के कारण युवाओं को भर्ती रैलियों में शामिल होने में दिक्कत आ रही है।
चेयरिंग दोरजे ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है और जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसकी तुलना 20 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को दिए गए मुआवजे से की।
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एलएबी का कहना है कि लद्दाख के लोग देशभक्त हैं और सीमाओं पर देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगठन ने कहा कि लेह की घटना पर देश में वैसी प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली जैसी दिल्ली की घटनाओं पर होती है।
संगठन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह लद्दाख के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे और युवाओं तथा प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए जल्द कदम उठाए।
गौरतलब है कि लद्दाख में लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर नागरिक समूह सक्रिय हैं। इनमें स्थानीय युवाओं के अधिकार, रोजगार, प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय हितों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। एलएबी ने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना ही क्षेत्र में विश्वास बहाली का सबसे बेहतर रास्ता है।
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