भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्ज़री बीएमडब्ल्यू कारों की खरीद के लिए जारी किए गए अपने विवादित टेंडर को रद्द कर दिया है। अधिकारियों ने गुरुवार (1 जनवरी 2026) को बताया कि यह फैसला टेंडर जारी होने के करीब दो महीने बाद लिया गया। इन सात कारों की अनुमानित कुल कीमत करीब ₹5 करोड़ थी।
लोकपाल का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं ने महंगी कारों की खरीद के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। अधिकारियों के अनुसार, लोकपाल की पूर्ण पीठ की बैठक में इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके बाद 16 दिसंबर 2025 को एक संशोधित अधिसूचना (कॉरिजेंडम) जारी कर टेंडर को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया।
लोकपाल ने 16 अक्टूबर 2025 को सात बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज़ 330Li कारों की आपूर्ति के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से निविदाएं आमंत्रित की थीं। यह वाहन लोकपाल के अध्यक्ष और छह सदस्यों के उपयोग के लिए प्रस्तावित थे। वर्तमान में लोकपाल की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर कर रहे हैं। नियमानुसार लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें चार न्यायिक और चार गैर-न्यायिक सदस्य शामिल होते हैं।
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टेंडर में बीएमडब्ल्यू 330Li ‘एम स्पोर्ट’ मॉडल, लंबे व्हीलबेस और सफेद रंग की कारों की मांग की गई थी। नई दिल्ली में इन कारों की ऑन-रोड कीमत लगभग ₹5 करोड़ आंकी गई थी। इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने लोकपाल पर ‘सादगी की बजाय विलासिता’ चुनने का आरोप लगाया था।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने लोकपाल को व्यंग्यात्मक रूप से “शौकपाल” कहा था। वहीं, नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भी टेंडर रद्द करने और भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की मांग की थी।
टेंडर दस्तावेज़ में यह भी प्रावधान था कि चयनित विक्रेता लोकपाल के चालकों और कर्मचारियों के लिए बीएमडब्ल्यू कारों के संचालन को लेकर सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। अब टेंडर रद्द होने के साथ ही इस पूरे प्रस्ताव पर विराम लग गया है।
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