राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को कहा कि औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश अधिकारी मैकाले की “साज़िशों” के माध्यम से भारतीयों के मन में हीनता की भावना भरी गई। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार वर्तमान सरकार ने इस मानसिकता पर “प्रहार करने का साहस” दिखाया है। राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रही थीं, जिससे बजट सत्र की शुरुआत हुई।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधुनिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक गौरव को भी समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “सांस्कृतिक दृष्टि से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में है और मेरी सरकार इस विरासत को देश की शक्ति में बदलने के लिए काम कर रही है।”
अपने संबोधन में उन्होंने 19वीं सदी के दौरान ब्रिटिश शासन में मैकाले की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके माध्यम से भारतीय समाज में आत्महीनता पैदा की गई। उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और समृद्ध करने की दिशा में हर स्तर पर काम कर रहा है।
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राष्ट्रपति ने बताया कि सरकार के प्रयासों से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष 125 वर्षों बाद भारत लौटे हैं और इन्हें जनता के दर्शन के लिए रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीकात्मक वर्ष है, जो भारत की सनातन संस्कृति और आस्था का प्रतीक है।
उन्होंने प्राचीन ज्ञान परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों और आज़ादी के बाद की उपेक्षा के कारण अमूल्य पांडुलिपियों को नुकसान हुआ, लेकिन अब ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत इनके डिजिटलीकरण का कार्य शुरू किया गया है। साथ ही, जनजातीय विरासत को संरक्षित करने के लिए जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना की जा रही है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जब हम अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करते हैं, तो दुनिया भी उनका सम्मान करती है। उन्होंने सभी सांसदों से राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर एकजुट होकर ‘विकसित भारत’ की यात्रा को नई ऊर्जा देने का आह्वान किया।
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