महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में सरकारी खर्च के रिकॉर्ड और वर्गीकरण के तरीके में बदलाव को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत राज्य की बजट लेखा प्रणाली को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा सुझाई गई ‘एकसमान मद-शीर्ष संरचना’ के अनुरूप बनाया जाएगा।
वित्त विभाग की ओर से गुरुवार को जारी शासन निर्णय (जीआर) के अनुसार, नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र में सरकारी खर्च के आंकड़ों को केंद्र सरकार और देश के अन्य राज्यों के खर्च से आसानी से तुलना करने योग्य बनाना है।
वर्तमान में अलग-अलग राज्यों और केंद्र के बजट में खर्च को दर्ज करने तथा विभिन्न मदों में वर्गीकृत करने के तरीकों में अंतर हो सकता है। इससे सरकारी व्यय के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण करने में कठिनाई आती है। नई एकसमान मद-शीर्ष व्यवस्था लागू होने के बाद खर्च के विभिन्न वर्गों और मदों को अधिक मानकीकृत तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।
और पढ़ें: महाराष्ट्र: सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों के लिए भेजी गईं दगडूशेठ गणपति की प्रतिमाएं, दूर पोस्टिंग पर भी गूंजेगा गणेशोत्सव
सरकार के अनुसार, यह कदम वित्तीय आंकड़ों में एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बजट तैयार करने, सरकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च का विश्लेषण करने और विभिन्न स्तरों पर वित्तीय प्रदर्शन की तुलना करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
नई प्रणाली के तहत राज्य सरकार के विभागों को खर्च दर्ज करने और उसका वर्गीकरण करने के लिए संशोधित ढांचे का पालन करना होगा। इससे वित्तीय प्रबंधन और बजट निगरानी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने संबंधित विभागों को नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि 1 अप्रैल 2027 से संशोधित बजट लेखा प्रणाली को सुचारु रूप से लागू किया जा सके।
और पढ़ें: नेपाल बाढ़: महाराष्ट्र के 206 लोग सुरक्षित लौटे, लापता लोगों की तलाश तेज