मणिपुर में सरकार गठन को लेकर तेज होती राजनीतिक चर्चाओं के बीच सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विधायक आज दिल्ली के लिए रवाना हो गए। राज्य में लगभग एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू है, जिसकी अवधि इस महीने समाप्त होने जा रही है। ऐसे में दिल्ली में होने वाली यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
मणिपुर में फरवरी 2025 में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिसे छह महीने बाद और विस्तार दिया गया। यह विस्तार 13 फरवरी को समाप्त हो रहा है। विधानसभा अभी “निलंबित अवस्था” में है, यानी भंग नहीं हुई है, लेकिन सक्रिय भी नहीं है। इसी समयसीमा के कारण राजनीतिक स्तर पर तेजी से परामर्श शुरू हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा कल NDA विधायकों से मुलाकात करेंगे। इम्फाल हवाई अड्डे पर कई विधायक दिल्ली जाने के लिए पहुंचे। भाजपा विधायक सोरोखाइबाम राजेन ने कहा कि सरकार गठन ही एजेंडा है और केंद्र द्वारा चुना गया कोई भी नेता उन्हें स्वीकार्य होगा। वहीं विधायक निशिकांत सिंह सपाम ने कहा कि पार्टी में नेतृत्व तय करने की अपनी आंतरिक प्रक्रिया है।
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मणिपुर भाजपा अध्यक्ष ए. शारदा देवी भी दिल्ली पहुंच चुकी हैं, जिससे संगठनात्मक और नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसलों की अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि, राज्य के कुछ इलाकों में कूकी जनजातीय संगठनों ने सरकार गठन का समर्थन न करने की बात कही है। कूकी समुदाय का एक वर्ग अलग प्रशासन की मांग कर रहा है, जो अब भी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बना हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि शासन एक सतत प्रक्रिया है और सभी NDA सहयोगियों को केंद्र ने बुलाया है। उन्होंने सकारात्मक नतीजों की उम्मीद जताई। मणिपुर में 2023 की हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत और करीब 50,000 लोग विस्थापित हुए थे। अब राज्य में स्थायी शांति और राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद की जा रही है।
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