मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को अगले महीने एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। इसी बीच राज्य में जनप्रिय (लोकप्रिय) सरकार के गठन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऐसे में कुकी-जो समुदाय के विधायक किसी नई सरकार में शामिल होंगे या नहीं, इस पर समुदाय के विभिन्न संगठन गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
कुकी जो काउंसिल (KZC) के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने The Indian Witness से बातचीत में कहा कि समुदाय के लोगों की भावना सरकार में शामिल होने के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “अगर कुछ विधायक सरकार में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो कुकी जो काउंसिल किसी भी जनाक्रोश या भीड़ को रोकने की स्थिति में नहीं होगी।” उनके इस बयान से स्पष्ट है कि समुदाय के भीतर इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी और संवेदनशीलता बनी हुई है।
कुकी-जो समुदाय से आने वाले 10 विधायकों में से एक विधायक ने बताया कि इस मसले पर अगले सप्ताह एक अहम बैठक होने की संभावना है। मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं और कुकी-जो विधायकों की भूमिका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। विधायक के अनुसार, “यह सवाल अभी विचाराधीन है और अगले सप्ताह विधायकों तथा सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के तहत सरकार से बातचीत कर रहे कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के साथ बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।”
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यह मुद्दा मणिपुर की मौजूदा राजनीति के सबसे बड़े सवालों में से एक है। कुकी-जो विधायक लंबे समय से अलग यूनियन टेरिटरी (केंद्र शासित प्रदेश) की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने इससे पहले बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ किसी भी तरह की भागीदारी या बातचीत को पूरी तरह खारिज कर दिया था। राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले तक उनका रुख बेहद सख्त रहा है।
अब जबकि राज्य में फिर से निर्वाचित सरकार के गठन की चर्चा हो रही है, कुकी-जो समुदाय और उनके प्रतिनिधियों का अगला कदम मणिपुर की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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