मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में ताजा हिंसा के दौरान अज्ञात हमलावरों ने एक परिवार पर गोलीबारी कर दी। इस हमले में एक महिला की मौत हो गई, जबकि उसके पति और छह वर्षीय बेटे को गोली लगी। घटना के बाद इम्फाल-जिरीबाम को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (एनएच-37) पर नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमला तामेंगलोंग जिले के टोलेन गांव में तड़के करीब 4 बजे हुआ। परिवार एनएच-37 के किनारे मौजूद था, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से नू लिंगजांगाई सिंगसित की मौत हो गई। उनके पति सेनेह सिंगसित घायल हुए, जबकि उनका छह वर्षीय बेटा भी गोली लगने से घायल हो गया।
परिवार के दो अन्य बच्चे हमले में सुरक्षित बच गए। घटना की सूचना मिलने के बाद कैमाई असम राइफल्स के जवानों ने कार्रवाई करते हुए घायल पिता और बेटे को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए जिरीबाम की ओर पहुंचाया।
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घटना की कुकी यूथ ऑर्गनाइजेशन महिला परिषद ने कड़ी निंदा की है। संगठन ने तत्काल निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग करते हुए दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने की अपील की। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए खुफिया तंत्र मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की गई।
कुकी इनपी जिरीबाम, तामेंगलोंग और नोनी (जेटीएन) ने भी हमले की निंदा की और संदिग्ध नागा उग्रवादियों पर जिम्मेदारी का आरोप लगाया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संगठन ने सवाल उठाया कि सुरक्षा बलों की तैनाती से कुछ ही दूरी पर हमला कैसे हुआ।
कुकी इनपी जेटीएन ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने और टोलेन में पर्याप्त सुरक्षा बलों की स्थायी तैनाती की मांग की है। संगठन ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की है और मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी दी है।
कैमाई ग्राम प्राधिकरण ने भी घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच और दोनों समुदायों से संयम बरतने की अपील की है। घटना कुकी समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले ‘ब्लैक डे’ के दिन हुई, जिसमें 1990 के दशक की हिंसक घटनाओं में मारे गए लोगों को याद किया जाता है।
हमलावरों की पहचान और हमले की पूरी परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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