बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह निष्कासित कर दिया। यह फैसला पूर्व राज्यसभा सदस्य और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने के बावजूद मायावती की नाराजगी बरकरार रहने के बाद आया है।
मायावती ने कहा कि आकाश आनंद अपने राजनीतिक करियर और पार्टी के हितों की तुलना में रिश्तों को अधिक महत्व दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश को अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से इतना लगाव है कि उन्होंने मायावती के सोशल मीडिया अकाउंट से किए गए उस पोस्ट को भी दोबारा साझा करना उचित नहीं समझा, जिसमें उनके राजनीतिक भविष्य और हितों से जुड़ी बात कही गई थी।
मायावती ने कहा कि बीएसपी ने आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को बेहद ऊंचाई तक पहुंचाया, लेकिन अब आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया गया है।
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बीएसपी प्रमुख ने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ को आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य और पार्टी तथा आंबेडकरवादी बहुजन आंदोलन के हितों की थोड़ी भी चिंता होती, तो वह एक दिन पहले ही राजनीति से संन्यास की घोषणा कर देते। उनके मुताबिक, ऐसा नहीं होने से सिद्धार्थ की महत्वाकांक्षा और मंशा पर सवाल उठते हैं।
मायावती ने कहा कि 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था। अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया गया है।
उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा से काम करने और विरोधियों की हर रणनीति का सामना करने की अपील की।
इससे पहले अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से तत्काल संन्यास लेने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि मायावती के आदेश के सामने उनके सभी रिश्ते महत्वहीन हैं। सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी बीएसपी के हितों के खिलाफ काम नहीं किया और कई महीनों से आकाश आनंद से मुलाकात तक नहीं हुई थी।
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