बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा का रविवार, 9 अगस्त 2026 को विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक सशक्तीकरण और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाते हुए उससे संविधान का सम्मान करने और आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव की वकालत बंद करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। विशेष रूप से एससी और एसटी समुदायों ने सदियों तक भेदभाव, शोषण और वंचना का सामना किया है।
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मायावती के मुताबिक, ऐसे समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए आरक्षण की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए इसे केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर देखने से इसके मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
बसपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था संविधान और सामाजिक न्याय की भावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने आरएसएस से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर ऐसी किसी पहल का समर्थन न करे, जिससे आरक्षण के मौजूदा स्वरूप में बदलाव की स्थिति पैदा हो।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। इस अवधारणा के तहत आरक्षण का लाभ पाने वाले अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग को अलग करने की बात कही जाती है।
मायावती ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने के विचार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है और आरक्षण को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
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