भारत सरकार ने मेटा के शीर्ष वैश्विक अधिकारियों को 5 और 6 अगस्त को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के लिए तलब किया है। इस बैठक में बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) से जुड़े मामलों, कंटेंट मॉडरेशन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और प्रमुख सोशल मीडिया खातों पर की गई कार्रवाई जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि सरकार के एजेंडे में सबसे अहम मुद्दा ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा है। सरकार मेटा से यह जानना चाहती है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान, उसे हटाने और उसके प्रसार को रोकने के लिए कौन-सी तकनीक और प्रक्रियाएं अपनाता है।
बैठक में यह भी पूछा जाएगा कि मेटा अवैध सामग्री की पहचान कितनी तेजी से करता है, उसके पास किस प्रकार के मॉडरेशन टूल हैं और बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए उसकी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
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इसके अलावा, सरकार उन मामलों पर भी स्पष्टीकरण मांगेगी, जिनमें कुछ प्रमुख सोशल मीडिया खातों पर कार्रवाई या प्रतिबंध लगाए गए। अधिकारियों का कहना है कि मेटा को यह स्पष्ट करना होगा कि किसी अकाउंट को हटाने या सीमित करने का निर्णय किन मानकों के आधार पर लिया जाता है और यदि किसी उपयोगकर्ता को लगता है कि उसके साथ गलत कार्रवाई हुई है, तो उसके पास अपील का क्या विकल्प उपलब्ध है।
एस. कृष्णन ने कहा कि मेटा जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप संचालित करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि स्वचालित मॉडरेशन के कारण सामान्य उपयोगकर्ताओं को अनावश्यक परेशानी न हो।
माना जा रहा है कि यह बैठक भारत सरकार और वैश्विक डिजिटल कंपनियों के बीच भविष्य की नीतियों, ऑनलाइन सुरक्षा, कंटेंट नियमन और प्लेटफॉर्म जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय करेगी।
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