भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने नागोया एशियन गेम्स में महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एशियन गेम्स में भारत के 28 साल लंबे वेटलिफ्टिंग पदक के इंतजार को खत्म कर दिया। कर्णम मल्लेश्वरी के 1998 में पदक जीतने के बाद चानू भारत की पहली एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग पदक विजेता बनी हैं।
32 वर्षीय चानू ने कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का भार उठाया। सात खिलाड़ियों वाली स्पर्धा में उनका प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त रहा।
उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने स्वर्ण पदक जीता और एशियन गेम्स में लगातार तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इंडोनेशिया की विजायना लुलुक दियानी त्रि ने 191 किलोग्राम के कुल भार के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 87 और क्लीन एंड जर्क में 103 किलोग्राम उठाया।
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चानू के रजत पदक ने उनके शानदार करियर में एक महत्वपूर्ण कमी भी पूरी कर दी। उनके नाम पहले ही ओलंपिक रजत, विश्व चैंपियनशिप खिताब और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक दर्ज हैं। इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीं।
चानू का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। रियो ओलंपिक में उनका अभियान वैध लिफ्ट दर्ज नहीं होने के कारण खत्म हो गया था। इसके पांच साल बाद टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने रजत पदक जीतकर शानदार वापसी की।
नागोया में मिला यह पदक भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए ऐतिहासिक है। चानू इस सात सदस्यीय स्पर्धा में सबसे उम्रदराज खिलाड़ी थीं। इस रजत के साथ भारत पदक तालिका में 11वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत के खाते में अब एक स्वर्ण, पांच रजत और पांच कांस्य पदक हैं।
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