राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत की प्रगति के लिए युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को देश का “जनसांख्यिकीय लाभांश” बताते हुए कहा कि उन्हें सही दिशा और अवसर दिए जाएं तो वे भारत के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
महाराष्ट्र के नागपुर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करते हुए भागवत ने कहा कि भारत को अपने विकास और रोजगार से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए दूसरे देशों की नीतियों की नकल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की परिस्थितियां इन देशों से अलग हैं।
भागवत ने कहा कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है, जबकि उसका भौगोलिक क्षेत्र कई बड़े देशों की तुलना में सीमित है। इसलिए देश को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप विकास की रणनीति तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए गंभीर अध्ययन और अलग सोच की आवश्यकता है।
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उन्होंने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि यदि उनकी क्षमता का सही तरीके से उपयोग किया गया तो वे देश के लिए बड़ी ताकत साबित होंगे, लेकिन यदि उन्हें सही दिशा नहीं मिली तो यही युवा समाज पर बोझ बन सकते हैं। उन्होंने रोजगार की व्यापक परिभाषा पर जोर देते हुए कहा कि रोजगार केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है। श्रम आधारित कार्य करने वाले लोगों के योगदान को भी सम्मान दिया जाना चाहिए।
भागवत ने कहा कि दुनिया आज भौतिकवादी सोच और सीमित दृष्टिकोण के कारण कई समस्याओं से जूझ रही है। भारत का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि, संतुलन और अनुभव के आधार पर दुनिया को बेहतर भविष्य का रास्ता दिखाए।
उन्होंने युवाओं से तिरंगे के महत्व और देश को ऊंचे स्थान तक पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रयासों को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की तुलना दूसरे देशों से करने के बजाय उसकी विशिष्ट परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
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