मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर मानने के फैसले के बाद यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने वहां जाकर दर्शन किए। बताया जा रहा है कि पिछले सात सौ वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह दौरा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले के कुछ दिनों बाद हुआ। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने वर्षों पुराने भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाते हुए धार स्थित इस ऐतिहासिक परिसर को मंदिर माना। यह मामला भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़ा हुआ था।
भोजशाला में पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत और सरस्वती वंदना का आयोजन किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मां वाग्देवी की आराधना की। इस दौरान सकल हिंदू समाज की ओर से मां वाग्देवी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं का दावा है कि 721 वर्षों बाद भोजशाला में यह परंपरा दोबारा निभाई गई है।
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समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को मां वाग्देवी का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया। मोहन यादव ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धार को मध्य प्रदेश का बड़ा पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे।
भोजशाला विवाद में हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों ने पूजा-अधिकार को लेकर अदालत का रुख किया था। मामले की सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि मस्जिद निर्माण से पहले वहां परमार कालीन विशाल संरचना मौजूद थी और वर्तमान भवन के कई हिस्सों में पुराने मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।
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