मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में उस व्यापारी को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे ‘आमचूर’ और ‘गरम मसाला’ में नारकोटिक्स होने के आरोप में 57 दिन तक जेल में रहना पड़ा था।
अदालत ने माना कि जांच और परीक्षण प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिसके कारण एक निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जेल में रहना पड़ा। इस मामले ने न्यायिक प्रणाली और फॉरेंसिक जांच की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट ने सिर्फ मुआवजा ही नहीं दिया, बल्कि राज्य सरकार को फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वे एक महीने के भीतर सभी क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब (आरएफएसएल) का निरीक्षण करें और उनकी कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की गलतियां भविष्य में नहीं दोहराई जानी चाहिए, क्योंकि इससे न केवल निर्दोष लोगों का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी जनता का भरोसा कमजोर होता है।
यह मामला तब सामने आया था जब व्यापारी पर आरोप लगाया गया था कि उसके पास मौजूद ‘आमचूर’ और ‘गरम मसाला’ में प्रतिबंधित नारकोटिक पदार्थ मिले हैं। बाद में जांच में यह आरोप गलत पाया गया, लेकिन तब तक उसे 57 दिन जेल में रहना पड़ा।
अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही का मामला है, जिसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।
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