लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एनएस राजा सुब्रमणि को भारत का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किए जाने के बाद कुछ हलकों में उठ रही आलोचना को रक्षा विशेषज्ञों ने “गलत और भ्रामक” बताया है। 9 मई को सरकार ने घोषणा की थी कि वे 30 मई को कार्यकाल समाप्त कर रहे जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे 2024–2025 तक सेना के उप प्रमुख भी रह चुके हैं।
आलोचकों का कहना है कि सीडीएस पद पर लगातार सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों की नियुक्ति से रक्षा मंत्रालय का “ब्यूरोक्रेटाइजेशन” हो रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का तर्क है कि सीडीएस पद 2019 में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए बनाया गया था और चयन पूरी तरह योग्यता आधारित होता है।
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2022 के नियमों के अनुसार, 62 वर्ष से कम उम्र के लेफ्टिनेंट जनरल, एयर मार्शल और वाइस एडमिरल को सीडीएस नियुक्त किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश सीडीएस पहले रिटायरमेंट के बाद ही नियुक्त हुए हैं, केवल जनरल बिपिन रावत अपवाद रहे हैं।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एनएससीएस में सैन्य सलाहकारों की नियुक्ति उनकी विशेषज्ञता पर आधारित होती है, न कि राजनीतिक कारणों पर। इसके अलावा, भारतीय सेना में सबसे अधिक 12.5 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि वायुसेना में 1.4 लाख और नौसेना में लगभग 70 हजार कर्मी हैं, जिससे सीडीएस चयन में सेना का प्रतिनिधित्व अधिक दिखता है।
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि का 40 वर्षों का शानदार सैन्य करियर रहा है। उन्होंने काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशनों से लेकर रणनीतिक कमांड तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं और उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
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