भारत और जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को तेजी से पूरा करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने निर्णय लिया है कि जापान की अगली पीढ़ी की ई10 शिंकानसेन ट्रेन उपलब्ध होने तक इस कॉरिडोर पर भारत में विकसित हाई-स्पीड ट्रेन से परिचालन शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश की पहली बुलेट ट्रेन सेवा को जल्द से जल्द शुरू करना है।
जापान की ई10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेन फिलहाल विकास के चरण में है और इसके शुरुआती 2030 के दशक में उपलब्ध होने की उम्मीद है। तब तक मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण पर भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन संचालित की जाएगी।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन सेवा का पहला चरण 15 अगस्त 2027 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-बिलिमोरा खंड पर ट्रेन का संचालन होगा। इसके बाद निर्माण कार्य पूरा होने के साथ सेवाओं का विस्तार क्रमशः वापी, अहमदाबाद, ठाणे और अंततः मुंबई तक किया जाएगा।
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रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे शुरू करने को लेकर आश्वस्त है। पूरी परियोजना के चालू होने के बाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है। इसके शुरू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग 2 घंटे 7 मिनट रह जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।
यह परियोजना मुख्य रूप से जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण से वित्तपोषित की जा रही है। हालांकि, परियोजना की लागत में लगभग 90,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि का पूरा खर्च भारतीय रेलवे अपने बजटीय संसाधनों से वहन करेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त राशि के लिए जापान से कोई नया ऋण लेने की योजना नहीं है।
इस परियोजना को भारत के रेल बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, जो देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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