भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, अब इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है। 508 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना देश के आधुनिक रेल बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव मानी जा रही है। परियोजना के ताजा अपडेट के अनुसार, निर्माण कार्य के साथ-साथ अब विद्युत प्रणाली से जुड़े कार्यों में भी तेजी लाई जा रही है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव मिल सके। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय मौजूदा छह से सात घंटे से घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा।
इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। ये स्टेशन महाराष्ट्र और गुजरात के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और शहरी केंद्रों को जोड़ेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
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परियोजना का इलेक्ट्रिफिकेशन चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे ट्रेनों को उच्च गति पर चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद होगी, क्योंकि इलेक्ट्रिक ट्रेनें पारंपरिक ईंधन आधारित परिवहन की तुलना में कम प्रदूषण करती हैं।
सरकार का मानना है कि यह बुलेट ट्रेन परियोजना न केवल भारत की रेल परिवहन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क वाले देशों की सूची में भी शामिल करेगी।
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