महाराष्ट्र के मुंबई के चेंबूर इलाके में स्कूल बस पर विशाल पीपल का पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस हादसे में चार अन्य बच्चे भी घायल हुए हैं, जिनमें एक चार वर्षीय बच्ची शामिल है। यह दुर्घटना मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे हुई, जब यूनिवर्सल हाई स्कूल की बस 13 छात्रों को उनके घर छोड़ने जा रही थी।
हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा था कि पेड़ों का गिरना या बिजली गिरना इंसानों के हाथ में नहीं होता और संभव है कि तेज हवा के कारण यह घटना हुई हो। उनके इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे सरकार की लापरवाही छिपाने की कोशिश बताया।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने आरोप लगाया कि सरकार की मानसून तैयारियां केवल कागजों तक सीमित थीं। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता क्लाइड क्रास्टो ने मंत्री की टिप्पणी को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि यदि समय रहते पेड़ों का निरीक्षण और छंटाई की जाती तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।
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बढ़ते विवाद के बीच बुधवार को संजय शिरसाट ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले नगर निकायों को ऐसे कमजोर पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाना चाहिए था, ताकि ऐसी घटनाएं न हों।
इस बीच लगातार हो रही भारी बारिश ने मुंबई महानगर क्षेत्र, ठाणे और पालघर में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पालघर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसके बाद जिले के सभी स्कूलों और कॉलेजों में गुरुवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है।
बारिश के दौरान मालाबार हिल के वॉकेश्वर इलाके में तीन मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं घाटकोपर में भी एक टेंपो पर पेड़ गिरने की घटना सामने आई। इन घटनाओं ने मानसून के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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