म्यांमार में आम चुनाव के अंतिम चरण का मतदान रविवार (25 जनवरी, 2026) को शुरू हो गया। यह तीन चरणों में कराई गई लगभग एक महीने लंबी चुनावी प्रक्रिया का अंतिम दौर है, जिसमें पहले ही यह सुनिश्चित हो चुका है कि देश की सैन्य सरकार और उसके सहयोगी संसद में बहुमत हासिल कर नई सरकार बनाएंगे।
आलोचकों का कहना है कि ये चुनाव न तो स्वतंत्र हैं और न ही निष्पक्ष, बल्कि फरवरी 2021 में आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटाने के बाद सेना की सत्ता को वैध ठहराने का प्रयास हैं। सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP) पहले दो चरणों में अधिकांश सीटें जीत चुकी है। इसके अलावा, राष्ट्रीय संसद के उच्च और निम्न सदनों की 25 प्रतिशत सीटें संविधान के तहत सीधे सेना के लिए आरक्षित हैं, जिससे सेना और उसके सहयोगियों का नियंत्रण सुनिश्चित हो जाता है।
वर्तमान सैन्य सरकार के प्रमुख सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग के नए संसद के गठन के बाद राष्ट्रपति बनने की व्यापक संभावना जताई जा रही है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद देश में व्यापक विरोध हुआ, जो धीरे-धीरे गृहयुद्ध में बदल गया। सुरक्षा हालात खराब होने के कारण देश के 330 में से एक-पांचवें से अधिक टाउनशिप में मतदान नहीं कराया जा सका, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर और सवाल उठे हैं।
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मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन ने कहा कि आसियान (ASEAN) ने चुनाव में पर्यवेक्षक नहीं भेजे और न ही परिणामों को मान्यता देगा। यह 11 देशों के इस क्षेत्रीय संगठन का पहला स्पष्ट संकेत है कि वह चुनाव नतीजों को स्वीकार नहीं करेगा।
पूर्व नेता आंग सान सू की और उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही हैं। सू की 27 साल की जेल की सजा काट रही हैं, जिन पर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित माना जाता है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पहले दो चरणों में USDP ने 233 सीटें जीतीं, जबकि सेना को 166 सीटें पहले से आवंटित हैं। इस तरह दोनों मिलकर सत्ता गठन के लिए आवश्यक बहुमत से कहीं अधिक सीटें हासिल कर चुके हैं। अंतिम नतीजों की घोषणा इस सप्ताह होने की उम्मीद है, जबकि संसद मार्च में और नई सरकार अप्रैल में कार्यभार संभालेगी।
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