केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने सोमवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बयान के दौरान विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य संसद में रचनात्मक चर्चा नहीं, बल्कि केवल अराजकता फैलाना है।
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद सबसे पहले दिवंगत नेताओं के लिए श्रद्धांजलि संदर्भ लिए गए और सदन के पटल पर सूचीबद्ध दस्तावेज रखे गए। इसके बाद राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान देने के लिए आमंत्रित किया।
हालांकि, इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बोलने की अनुमति मांगी। इस पर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने नारेबाजी की।
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हंगामे के बीच विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जे.पी. नड्डा ने कहा कि जब सरकार गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जानकारी देना चाहती है, तब भी विपक्ष सहयोग नहीं करता।
उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन विपक्ष बार-बार हंगामा करके संसद की कार्यवाही बाधित करता है।
नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण विषय है और इस पर सरकार का दृष्टिकोण सुनना और समझना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह संसद की गरिमा बनाए रखते हुए जिम्मेदार व्यवहार करे।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और चर्चा ही समस्याओं का समाधान है, न कि हंगामा और वॉकआउट।
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