हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में हुए धमाके के एक दिन बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं। इसके साथ ही फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य और नमूने एकत्र किए हैं।
इस बीच सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और एक कम चर्चित समूह ‘पंजाब सॉवरेन्टी एलायंस’ ने धमाके की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। पोस्ट में कहा गया है कि विस्फोट के लिए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) का इस्तेमाल किया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि यह हमला हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा हिमाचल में निर्मित सिंथेटिक ड्रग्स की पंजाब में तस्करी के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने के विरोध में किया गया।
पोस्ट में चेतावनी भी दी गई है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस प्रशासन के वाहनों और मुख्यालयों में आईईडी लगाए जाएंगे। हालांकि, पुलिस ने इस सोशल मीडिया पोस्ट पर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
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शुक्रवार शाम जारी बयान में पुलिस ने बताया कि जांच के लिए पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के साथ समन्वय किया जा रहा है। गुरुवार को नए साल की सुबह नालागढ़ के कई निवासियों की नींद उस धमाके की आवाज से खुली, जो पुलिस थाने के पास एक गली में हुआ था।
धमाके का असर इतना तेज था कि पास की इमारतों, यहां तक कि करीब 40 मीटर दूर स्थित सेना की कैंटीन की खिड़कियों के शीशे भी चटक गए। स्थानीय लोगों के अनुसार धमाके की आवाज 400 से 500 मीटर दूर तक सुनी गई।
इस मामले में नालागढ़ पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 324(4) (शरारत) और धारा 125 (मानव जीवन को खतरे में डालने वाला लापरवाह कृत्य) के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पड़ोसी राज्य पंजाब में भी हाल के समय में पुलिस थानों को निशाना बनाकर इसी तरह के हमले हुए हैं, जिनमें पंजाब के डीजीपी ने पाकिस्तान पर शांति भंग करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
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