नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सोमवार को सुनवाई नहीं की। यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
ईडी ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का आदेश न्यायिक समीक्षा योग्य है और आरोपपत्र में मौजूद सामग्री पर संज्ञान लिया जाना चाहिए।
इससे पहले 22 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कई आरोपियों को नोटिस जारी किया था। इनमें सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी शामिल हैं।
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ईडी का आरोप है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग साजिश का हिस्सा थे। एजेंसी के अनुसार, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की लगभग 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को संदिग्ध तरीके से हासिल किया गया।
ईडी का यह भी कहना है कि यंग इंडियन में गांधी परिवार की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण कर लिया।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला कानूनी प्रश्न से जुड़ा है और ट्रायल कोर्ट का फैसला “स्पष्ट रूप से गलत” है। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि बिना एफआईआर के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला आगे नहीं बढ़ सकता।
ईडी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि इस तरह का निर्णय मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एक कानूनी खामी पैदा कर सकता है।
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