राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातकोत्तर) यानी NEET PG 2025-26 के तहत देशभर में बड़ी संख्या में मेडिकल पीजी सीटें खाली रह गई हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां सबसे अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीटें रिक्त पड़ी हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, राउंड-2 काउंसलिंग पूरी होने के बावजूद देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में 18,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें नहीं भर पाई हैं। इनमें एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की सीटें शामिल हैं। यह स्थिति मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और सीट आवंटन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
सीटों के खाली रहने के मद्देनजर नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने NEET PG के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में संशोधन किया है। एनबीईएमएस ने बताया कि इस वर्ष तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों का क्वालिफाइंग परसेंटाइल घटाकर शून्य कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक सीटें भरी जा सकें।
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विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें कॉलेजों की फीस, भौगोलिक स्थान, पाठ्यक्रम की मांग, और छात्रों की प्राथमिकताएं शामिल हैं। कुछ राज्यों में निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित संस्थाएं अब शेष काउंसलिंग राउंड के जरिए सीटें भरने की कोशिश कर रही हैं, ताकि मेडिकल शिक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।
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